Joins in DBMS in Hindi
Joins in DBMS
Join Database Management System (DBMS)) का एक प्रकिया है जो किसी डेटाबेस के दो या अधिक tables के डेटा (Records) को मिलाकर एक नया टेबल बनाता है। यह प्रकिया दो tables के बीच एक सामान्य कॉलम के आधार पर किया जाता है।
दुसरे शब्दों में किसी database (table) के दो या दो से अधिक डेटा को आपस में जोड़ने (combine) हमें एक नया टेबल प्राप्त होता है इस प्रकिया अथवा operation को dbms में Join कहा जाता है।
यह tables के बीच Common Column (जैसे Primary Key या Foreign Key) के आधार पर किया जाता है, ताकि संबंधित डेटा को एक साथ प्राप्त किया जा सके।
इसे उदाहरण से समझते है :
यहाँ पर दो table दिया गया है जिसमे student का database है


Table 1 और Table 2 ये दोनों टेबल में एक मिलता जुलता column (कॉमन key) है, इसलिए इसमें “Subject” column को Table 1 में जोड़कर एक नया टेबल बना सकते है:

Join के प्रकार (Types of Joins)
सभी join का अलग-अलग तरीका होता है डेटा को combine करने का, Join के निम्न प्रकार होते हैं:
- Inner Join
- Outer Join
- Self Join

1. Inner Join
यह सबसे सरल और अधिक प्रयोग किया जाने वाला joins है। यह केवल उन tables (रिकॉर्ड्स) को दिखाता है जिसमे दोनों tables में मिलने वाली कॉलम की डेटा समान होती है। सरल शब्दों में कहे तो यह केवल उन्हीं रिकॉर्ड्स को दिखाता है जहाँ दोनों tables में मिलान (match) होता है।
इसे इस diagram से समझ सकते है:

Example
SQL
SELECT table1.name, table1.age, table1.address, table1.phone no, table2.subject
FROM table1
INNER JOIN table2
ON table1.roll no = table2.roll no;
2. Outer Join
Outer Join में दो टेबल्स के बीच डेटा को जोड़ता (combine) है, जिसमें एक टेबल के सभी रिकॉर्ड्स शामिल होते हैं, भले ही दुसरे टेबल में उसका मिलान हो या न हो। यह मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है:
- Left Outer Join
- Right Outer Join
- Full Outer Join
a. Left Outer Join
Left Outer Join में पहली टेबल (table1) के सभी डेटा (रिकॉर्ड्स) शामिल होते हैं, और दूसरी टेबल से केवल मिलान करने वाले रिकॉर्ड्स ही लिए जाते हैं। यदि दूसरी टेबल में मिलान न हो, तो वहां NULL मान प्रदर्शित होगा।
सरल शब्दों में Left Outer Join में left table (table1) के डेटा को ही लिया जाता है इसलिए इसे Left Outer Join कहते है। right table के उन्ही डेटा को लिया जाता है जो left table के साथ match करता है।
इसे इस diagram से समझ सकते है:

b. Right Outer Join
यह Left Outer Join से उल्टा होता है अर्थात Right Join में दुसरे टेबल (table2) के सभी डेटा (रिकॉर्ड्स) शामिल होते हैं, और पहले टेबल (table1) से केवल मिलान करने वाले डेटा ही लिए जाते हैं। यदि table1 में मिलान न हो, तो वहां NULL मान प्रदर्शित होगा।
इसे इस diagram से समझ सकते है:

c. Full Outer Join
Full Outer Join इसमें दोनों table के सभी डेटा (रिकॉर्ड्स) को शामिल करता है, चाहे उनके बीच मैच हो या न हो। यदि किसी टेबल में कोई मैचिंग डेटा नहीं है, तो वहां NULL मान प्रदर्शित होगा।
सरल शब्दों में, हमारे पास दो table है table1 और table2. दोनों table के डेटा एक दुसरे से match कर रहे है और जो match नहीं कर रहे है सभी डेटा प्रदर्शित होगा।
इसे इस diagram से समझ सकते है:

3. Self Join
जब एक ही टेबल को अलग-अलग column नाम देकर खुद के साथ जोड़ा जाता है, तो उसे Self Join कहते हैं। इस तरह के join का उपयोग किसी दो column के डेटा को तुलना करने में किया जाता है।
दुसरे शब्दो में, जब एक table स्वयं से join होता है तो इसे Self Join कहते है। यह तब उपयोगी होता है जब टेबल के rows के बीच संबंध होते हैं।
